FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत! बैंक बदलने पर नहीं बदलना पड़ेगा FASTag, OneTag से आसान होगी पोर्टेबिलिटी
FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत
नई दिल्ली: देश में हाईवे पर टोल भुगतान की व्यवस्था को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने OneTag सुविधा शुरू की है, जिसके जरिए FASTag यूजर्स को बैंक बदलने के लिए अपने वाहन पर लगा FASTag बदलने की जरूरत नहीं होगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य FASTag को ज्यादा सुविधाजनक और पोर्टेबल बनाना है। यानी वाहन मालिक अपनी जरूरत के मुताबिक FASTag से जुड़े बैंक को बदल सकेंगे, जबकि वाहन पर लगा टैग वही रहेगा।
Highlights
- OneTag से FASTag की बैंक पोर्टेबिलिटी आसान होगी
- बैंक बदलने पर नया FASTag लगाने की जरूरत नहीं होगी
- मौजूदा टैग के जरिए ही टोल भुगतान जारी रखा जा सकेगा
- सुविधा को डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है
- सरकार बैरियर-फ्री टोलिंग की ओर भी तेजी से बढ़ रही है
- AI कैमरा, ANPR और FASTag के जरिए वाहनों को बिना रोके टोल वसूली का लक्ष्य

बैंक बदलने पर अब नहीं बदलना पड़ेगा FASTag
अभी तक किसी वाहन मालिक को FASTag से जुड़े बैंक को बदलना होता था तो कई मामलों में पुराने टैग को बंद कराने और नए बैंक से नया FASTag लेने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसके बाद नए टैग को वाहन की विंडशील्ड पर लगाना पड़ता था।
OneTag इसी परेशानी को कम करने के लिए तैयार किया गया है। नई व्यवस्था में ग्राहक बैंक बदल सकता है, जबकि वाहन पर लगा FASTag बरकरार रहेगा।
इसका सीधा फायदा उन वाहन मालिकों को मिलेगा जो FASTag सेवाओं के लिए अपना बैंक बदलना चाहते हैं लेकिन नया टैग लेने की झंझट से बचना चाहते हैं।
OneTag कैसे काम करेगा?
OneTag को FASTag की portability solution के तौर पर देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ग्राहक की पात्रता और जरूरी सत्यापन के बाद FASTag को नए बैंक से जोड़ा जा सकेगा।
इस प्रक्रिया में वाहन से जुड़ी FASTag पहचान को बरकरार रखने का उद्देश्य है, ताकि बैंक बदलने के लिए टैग को दोबारा जारी कराने की जरूरत न पड़े। सुविधा को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में RajmargYatra ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।
टोल व्यवस्था में भी होने वाला है बड़ा बदलाव
FASTag में पोर्टेबिलिटी के साथ-साथ सरकार हाईवे पर बैरियर-फ्री टोलिंग लागू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
इस व्यवस्था में वाहन को टोल प्लाजा पर रुककर भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए FASTag, RFID और Automatic Number Plate Recognition (ANPR) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI आधारित कैमरों की मदद से वाहन की पहचान कर टोल शुल्क डिजिटल तरीके से वसूलने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
सरकार ने मई 2026 में गुजरात के NH-48 पर भारत का पहला Multi-Lane Free Flow (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया था। इसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होती।
कब तक खत्म हो सकते हैं टोल प्लाजा के बैरियर?
नितिन गडकरी ने अब देश में बैरियर-फ्री टोलिंग के विस्तार का लक्ष्य 2027 की शुरुआत तक रखने की बात कही है। अलग-अलग रिपोर्टों में फरवरी और मार्च 2027 की समयसीमा सामने आई है। इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाला लक्ष्य समझना ज्यादा सही होगा, न कि यह मानना कि एक ही दिन में देश के सभी टोल प्लाजा बदल जाएंगे।
सरकार पहले से कई टोल प्लाजा पर MLFF व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया में है। मार्च 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक FASTag के साथ ANPR/AI आधारित बैरियर-लेस टोलिंग के लिए कई प्लाजा पर काम आगे बढ़ाया जा रहा था और अतिरिक्त प्लाजा के लिए भी प्रक्रिया शुरू की गई थी।
वाहन चालकों को क्या फायदा होगा?
बैरियर-फ्री व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार और रुकने का समय कम होगा। इससे यात्रा का समय बचने के साथ ईंधन की खपत और टोल प्लाजा पर होने वाले संचालन संबंधी खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।
वहीं OneTag FASTag को ज्यादा लचीला बनाएगा। बैंक बदलने के लिए बार-बार नया टैग लेने की जरूरत कम होने से वाहन मालिकों के लिए FASTag मैनेज करना आसान हो सकता है।
FASTag के बाद अब ‘स्मार्ट टोलिंग’ की ओर भारत
FASTag ने पहले ही टोल भुगतान को कैशलेस बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब सरकार अगला कदम उठाते हुए AI, ANPR और Multi-Lane Free Flow जैसी तकनीकों के जरिए टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।
अगर OneTag और बैरियर-फ्री टोलिंग का विस्तार तय योजना के मुताबिक होता है, तो आने वाले समय में हाईवे पर टोल भुगतान का अनुभव मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी अलग नजर आ सकता है।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।