‘UPI टैक्स’ वापस लो: इंदिरा गांधी का जिक्र कर राहुल गांधी का PM मोदी पर तंज, सरकार ने कहा- ग्राहक से नहीं लिया जाएगा शुल्क
‘UPI Tax’ वापस लो: राहुल गांधी का PM मोदी पर तंज
नई दिल्ली: UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर नए Merchant Discount Rate (MDR) ढांचे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 16 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए नए UPI शुल्क को “UPI Tax” कहा और इसे वापस लेने की मांग की।
राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर तंज किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी से कभी पूछा गया था कि उनका झुकाव लेफ्ट या राइट की तरफ है, जिस पर उन्होंने खुद को सीधा खड़ा रहने वाला बताया था। इसके बाद राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अपनी राजनीतिक टिप्पणी की।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी से “UPI tax” वापस लेने की मांग की। उन्होंने नए शुल्क को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए इसे अमेरिका से जुड़े दबाव के संदर्भ में भी जोड़ा।
उनके मुताबिक, सरकार के इस फैसले से UPI पर अतिरिक्त शुल्क व्यवस्था आ रही है और उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है। ये राहुल गांधी और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप/दावे हैं।
इंदिरा गांधी के बयान का क्यों किया जिक्र?
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में इंदिरा गांधी के उस कथित पुराने जवाब का संदर्भ दिया जिसमें उनसे पूछा गया था कि वह राजनीतिक रूप से लेफ्ट या राइट की तरफ झुकती हैं या नहीं।
राहुल गांधी ने इस संदर्भ को प्रधानमंत्री मोदी पर अपनी टिप्पणी से जोड़ते हुए कहा कि मोदी का तरीका अलग है और इसके बाद उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख किया।

क्या सच में UPI पर ‘टैक्स’ लगाया गया है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
“UPI Tax” आधिकारिक शुल्क का नाम नहीं है। सरकार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों में इसे Merchant Discount Rate (MDR) के रूप में बताया गया है।
नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा UPI Person-to-Merchant (P2M) transactions में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹2,000 तक के भुगतान और Person-to-Person (P2P) transactions को इस शुल्क से अलग रखा गया है।
ग्राहक को सीधे ₹300 नहीं देना होगा
UPI शुल्क को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा भी चल रहा है कि ₹2,000 से ऊपर भुगतान करने पर ग्राहक से सीधे चार्ज लिया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूलने वाला शुल्क नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इसे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी और UPI apps द्वारा भी कोई छिपा हुआ platform charge नहीं लगाया जाना चाहिए।
₹75,000 या उससे ज्यादा के भुगतान पर ₹300 की सीमा
नए ढांचे में ₹75,000 और उससे अधिक के पात्र merchant transactions पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction बताई गई है।
यानी ₹300 को हर ₹2,000 से अधिक UPI payment पर लगने वाला शुल्क समझना सही नहीं है। 0.4% की दर और लागू cap के आधार पर शुल्क की गणना की जाएगी।
सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों पर क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने UPI MDR के फैसले को लेकर विदेशी दबाव के दावे को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत की UPI नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं और इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान ecosystem में शामिल बैंकों और अन्य प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
सरकार ने rollback से भी किया इनकार
UPI शुल्क को वापस लेने की राहुल गांधी की मांग के बीच सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि फिलहाल इस फैसले को वापस लेने का सवाल नहीं है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक निर्णय पहले ही लिया जा चुका है और 15 अक्टूबर से नया MDR framework लागू होने की तैयारी है।
UPI शुल्क पर राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा?
UPI भारत में डिजिटल भुगतान का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24,508.96 मिलियन transactions हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रहा।
ऐसे में ₹2,000 से ज्यादा के कुछ merchant payments पर MDR लागू करने का फैसला व्यापारियों, payment companies और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि ग्राहकों के लिए UPI payment व्यवस्था जारी रहेगी और MDR का सीधा बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।
निष्कर्ष
UPI को लेकर मौजूदा विवाद में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है—राहुल गांधी ने नए MDR को राजनीतिक तौर पर “UPI Tax” कहा है और इसे वापस लेने की मांग की है, जबकि सरकार इसे MDR framework बताती है और कहती है कि ग्राहक से यह शुल्क सीधे नहीं लिया जाएगा।
नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के merchant UPI payments पर लागू होने वाला है।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।