नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद के बीच चुनाव आयोग ने All India Trinamool Congress के पारंपरिक नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के संदर्भ में की गई है।
इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं।
ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग के फैसले के मुताबिक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को “Mamata All India Trinamool Congress” नाम दिया गया है। इस गुट के लिए ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
वहीं दूसरे गुट को “Democratic Trinamool Congress” नाम और ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। दोनों पहचानें फिलहाल संबंधित उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू हैं।
ममता बनर्जी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट
चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मूल TMC नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को फ्रीज किया गया है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मामले की सुनवाई 21 सितंबर के आसपास होने की संभावना बताई गई है।

उपचुनाव से पहले बदला चुनावी समीकरण
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह तय किए हैं।
नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।
रेजीनगर में उम्मीदवार ने बदला फैसला
रेजीनगर सीट पर ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए कहा कि वह चुनाव लड़ेंगे। यह घटनाक्रम भी TMC के भीतर चल रहे मौजूदा राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल TMC के पारंपरिक नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू है, जबकि ममता बनर्जी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।