शामली के आयुष मलिक केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धर्म और जीवनसाथी चुनने की आजादी; जानें पूरा मामला
शामली के आयुष मलिक केस में आया हाईकोर्ट का फैसला
उत्तर प्रदेश के शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण और विवाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश दिया। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए 31 वर्षीय आयुष मलिक को स्वतंत्र कर दिया।
अदालत के सामने आयुष ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था और वह चांदनी कुरैशी के साथ वैवाहिक संबंध रखना चाहते हैं। अदालत ने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति के धर्म और जीवनसाथी से जुड़े फैसले में केवल पारिवारिक असहमति के आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
कोर्ट में आयुष ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान आयुष मलिक ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था। उनके अनुसार धर्म परिवर्तन के फैसले के पीछे किसी तरह का दबाव, धमकी, जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन नहीं था।
आयुष ने यह भी कहा कि वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को उनका फैसला स्वीकार नहीं था और इसके बाद उन्हें घर में रोककर रखा गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति सामान्य तौर पर अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपना धर्म तय करने का अधिकार रखता है। अदालत के अनुसार व्यक्तिगत स्वायत्तता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़े ऐसे फैसले केवल इसलिए नहीं बदले जा सकते क्योंकि वे परिवार के सदस्यों को स्वीकार्य नहीं हैं।
अदालत ने यह भी माना कि किसी व्यक्ति का जीवनसाथी चुनना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। परिवार की असहमति अपने-आप में किसी बालिग व्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का कानूनी आधार नहीं बन सकती।
आयुष को किन चीजों की स्वतंत्रता मिली?
अदालत ने आयुष मलिक को अपनी इच्छा के अनुसार रहने और अपने चुने हुए धर्म को मानने-पालन करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही, उन्हें कानून के अनुसार अपने वैवाहिक संबंध के बारे में उचित फैसला लेने के लिए भी स्वतंत्र बताया गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पिता की अपने बेटे के भविष्य और कल्याण को लेकर चिंता समझी जा सकती है, लेकिन ऐसी चिंता किसी सक्षम बालिग व्यक्ति की संवैधानिक रूप से संरक्षित व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हावी नहीं हो सकती।
कैसे शुरू हुआ था मामला?

इस मामले में आयुष के पिता देवराज सिंह मलिक ने अपने बेटे के धर्म परिवर्तन और चांदनी कुरैशी से जुड़े मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। चांदनी कुरैशी और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 और भारतीय न्याय संहिता की कुछ धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी।
बाद में आयुष के दोस्त सुल्तान की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुष को उनके पिता की ओर से अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।
9 सितंबर को हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आयुष को 16 सितंबर को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद शामली पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया।
चांदनी कुरैशी और उनके पिता को पहले मिल चुकी है जमानत
इस मामले में चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में 24 जुलाई 2026 को शामली की जिला एवं सत्र अदालत ने दोनों को जमानत दे दी थी।
हाईकोर्ट का फैसला किस मामले तक सीमित है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। हाईकोर्ट का यह आदेश मुख्य रूप से आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से संबंधित है। अदालत ने आयुष को स्वतंत्र रूप से रहने, धर्म का पालन करने और अपने वैवाहिक संबंध के बारे में कानून के अनुसार फैसला लेने की स्वतंत्रता दी है।
इस आदेश को संबंधित अन्य आरोपों या आपराधिक मामले में सभी आरोपों के अंतिम निपटारे के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। संबंधित FIR और उसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की कानूनी स्थिति अलग प्रक्रिया का विषय है।
क्या कहा जा सकता है फैसले का सार?
आयुष मलिक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मूल रूप से एक बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धर्म चुनने और जीवनसाथी से जुड़े फैसले के अधिकार पर जोर दिया है। कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।