मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद पर क्या चलेगा बुलडोजर? हाईकोर्ट में MDA ने दिया बड़ा आश्वासन
मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मुस्तफा मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया है। पाकबड़ा क्षेत्र में दिल्ली रोड पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) के पास स्थित इस मस्जिद को लेकर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज और स्वीकृत नक्शे की जानकारी मांगी थी। बाद में मस्जिद प्रबंधन ने नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में MDA ने क्या कहा?
24 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान MDA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने अदालत से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। इसी दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक औपचारिक ध्वस्तीकरण आदेश पारित नहीं होता, तब तक मस्जिद के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ के समक्ष हुई थी।
MDA ने क्यों जारी किया था नोटिस?
मामला 21 अगस्त 2026 को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार MDA ने मस्जिद प्रबंधन से निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शे और संबंधित दस्तावेज मांगे थे।
प्राधिकरण के अनुसार मस्जिद लगभग 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित है और शिकायत के बाद निर्माण संबंधी रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई। MDA की ओर से निर्माण को लेकर अनुमति संबंधी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि निर्माण अवैध है। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक MDA ने भी कहा था कि दस्तावेजों की जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

मस्जिद प्रबंधन का क्या कहना है?
मस्जिद प्रबंधन ने निर्माण को लेकर उठाए गए सवालों पर आपत्ति जताई है। प्रबंधन की ओर से कहा गया कि यह कोई नया निर्माण नहीं है और मस्जिद कई वर्षों से वहां मौजूद है। सितंबर की शुरुआती रिपोर्टों में मस्जिद के इमाम ने इसे दशकों पुरानी संरचना बताया था।
हाईकोर्ट में मस्जिद पक्ष की ओर से यह दलील भी रखी गई कि नोटिस में जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। इसके अलावा जमीन और प्रस्तावित कार्रवाई से संबंधित विवरण को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई।
300 वर्ग मीटर जमीन और नक्शे का विवाद
मामले में मुख्य सवालों में से एक मस्जिद के निर्माण से संबंधित स्वीकृत दस्तावेज और नक्शा है। MDA का कहना है कि उसे संबंधित अनुमति के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जबकि मस्जिद पक्ष निर्माण की पुरानी स्थिति और अपने दस्तावेजों को लेकर अदालत में अपना पक्ष रख रहा है।
यानी फिलहाल विवाद का केंद्र निर्माण की वैधता और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच है, न कि कोई अंतिम ध्वस्तीकरण फैसला।
पहले भी इसी इलाके में हुई थी कार्रवाई
इस मामले की चर्चा उस समय और बढ़ गई थी जब इसी क्षेत्र में बाबा फौलाद शाह की मजार को लेकर जुलाई 2026 में प्रशासन ने कार्रवाई की थी। प्रशासन की ओर से उस कार्रवाई के संबंध में अतिक्रमण और तालाब की जमीन से जुड़े दावे किए गए थे। मुस्तफा मस्जिद का मामला अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहा है।
अभी क्या है मुस्तफा मस्जिद की स्थिति?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मस्जिद को गिराने का अंतिम फैसला हो चुका है। MDA ने हाईकोर्ट में यह आश्वासन दिया है कि औपचारिक ध्वस्तीकरण आदेश के बिना कार्रवाई नहीं की जाएगी। वहीं मस्जिद प्रबंधन अपने खिलाफ जारी नोटिस को अदालत में चुनौती दे रहा है।
आगे की स्थिति अदालत की कार्यवाही और MDA द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल “मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलेगा” को अंतिम न्यायिक फैसला मानना सही नहीं होगा।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।