अमरोहा के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. महताब अमरोहवी की पुस्तक ‘फ़न-ए-क़लम निगारी और कुछ मेरे कॉलम’ का विमोचन, सहाफ़त और अदब की नामवर हस्तियों ने की शिरकत
अमरोहा की पत्रकारिता और साहित्य को समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन
अमरोहा: अमरोहा की पत्रकारिता और साहित्यिक जगत से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार डॉ. महताब अमरोहवी की पुस्तक ‘फ़न-ए-क़लम निगारी और कुछ मेरे कॉलम’ का विमोचन रविवार 20 सितंबर 2026 को नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज, नफ़ीस अब्बासी, कैलसा रोड, अमरोहा में आयोजित एक विशेष समारोह में किया गया।
कार्यक्रम में पत्रकारिता, सहाफ़त, साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़ी कई हस्तियों ने शिरकत की। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश अंजुमन तरक़्क़ी के उपाध्यक्ष डॉ. सिराज उद्दीन हाश्मी ने की।
पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सदर विधायक एवं उत्तर प्रदेश लोक लेखा समिति के अध्यक्ष तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी महबूब अली मौजूद रहे।
हाजी महबूब अली ने की निष्पक्ष पत्रकारिता की सराहना
मुख्य अतिथि हाजी महबूब अली ने डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के विमोचन पर मुबारकबाद देते हुए कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता के क्षेत्र में कई चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता और गंभीर स्तंभ लेखन करना अपने आप में महत्वपूर्ण कार्य है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। ऐसे में निष्पक्ष पत्रकारिता के विकास और संरक्षण के लिए अच्छे लेखन को प्रोत्साहित करना जरूरी है।
उन्होंने डॉ. महताब अमरोहवी की लेखन शैली की सराहना करते हुए कहा कि उनकी पुस्तक पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पत्रकारिता में शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी पुस्तक सामग्री उपलब्ध कराने का काम करेगी।

“कॉलम समाज का खूबसूरत आईना होते हैं”
हाजी महबूब अली ने कहा कि कॉलम समाज का एक खूबसूरत आईना होते हैं। एक गंभीर कॉलमनिगार अपने लेखन के माध्यम से समाज में मौजूद मुद्दों और परिस्थितियों को पाठकों के सामने रखता है।
उन्होंने कहा कि सहाफ़त और क़लम समाज की तस्वीर को सामने लाने का माध्यम हैं और डॉ. महताब अमरोहवी ने लंबे समय से इस क्षेत्र में लेखन के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है।
पांच वर्षों की मेहनत का नतीजा है पुस्तक
पुस्तक के लेखक डॉ. महताब अमरोहवी ने अपनी किताब के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह पुस्तक लगभग पांच वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में खबरों के चयन, खबर की भाषा, किस स्थान पर किस प्रकार की खबर प्रकाशित की जानी चाहिए और किसी खबर का समाज के विभिन्न वर्गों पर क्या प्रभाव पड़ता है जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
इसके अलावा संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले कॉलम के चयन, उसकी भाषा, विषय, सामाजिक महत्व और रोजमर्रा की घटनाओं से उसके संबंध जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी पुस्तक में शामिल किया गया है।
डॉ. महताब अमरोहवी ने पत्रकारिता की विभिन्न तकनीकों और कॉलम लेखन की बारीकियों को भी पुस्तक का हिस्सा बनाया है।
“कॉलम लिखना दब चुकी आवाजों को सामने लाना है”
कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए डॉ. जमशेद कमाल अमरोहवी ने कहा कि कॉलम लिखना केवल किसी विषय पर विचार व्यक्त करना नहीं है, बल्कि समाज की उन आवाजों को सामने लाने का माध्यम भी है जो कहीं दब गई हों या जिन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही हो।
उन्होंने कहा कि एक कॉलमनिगार अपनी तहरीर के माध्यम से उन मसलों और आवाजों को सामने लाता है जिन्हें आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

डॉ. तारिक अज़ीम ने बताया क़लम की ताकत का सम्मान
डॉ. तारिक अज़ीम एडवोकेट ने कहा कि डॉ. महताब अमरोहवी की पुस्तक का विमोचन महज एक किताब के रस्म-ए-इजरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क़लम की ताकत और उसकी इज्जत व एहतराम का भी एतराफ़ है।
उन्होंने डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के प्रकाशन पर मुबारकबाद दी।
प्रो. नाशिर नक़वी ने किया केंद्रीय संबोधन
कार्यक्रम में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू-फ़ारसी प्रो. नाशिर नक़वी ने केंद्रीय संबोधन किया। उन्होंने पत्रकारिता, भाषा और साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
वहीं डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीक़ी की गैर-मौजूदगी में उनकी ओर से डॉ. महताब अमरोहवी के नाम भेजा गया संदेश सईद तनवीर हसन ने पढ़कर सुनाया।
इसके अलावा डॉ. जमशेद कमाल, सैयद महबूब जैदी, डॉ. तारिक अज़ीम एडवोकेट और डॉ. नासिर अमरोही समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में अदब और सहाफ़त का रहा संगम
कार्यक्रम के सरपरस्त नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज के सदर फ़िरोज़ कमाल अब्बासी विदेश में होने के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनकी ओर से मेहमानों का स्वागत और शुक्रिया अदा किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत उनेसा रमीज़ द्वारा तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जबकि डॉ. मुबारक अमरोहवी ने नात-ए-पाक का नजराना पेश किया। कार्यक्रम की निजामत सैयद शैबान क़ादरी ने की।
महबूब हुसैन जैदी ने भी डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के विमोचन पर मुबारकबाद देते हुए इसे पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक में सहाफ़त और कॉलम निगारी को केवल लेखन की क्षमता के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदाराना क़लमी फ़न के रूप में समझाने की कोशिश की गई है।
डॉ. सिराज उद्दीन हाश्मी ने दी मुबारकबाद
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सिराज उद्दीन हाश्मी ने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और डॉ. महताब अमरोहवी को पुस्तक के विमोचन पर मुबारकबाद पेश की।

अंत में नायाब अब्बासी डिग्री कॉलेज के ज्वाइंट सेक्रेटरी क़सीम अशरफ़ ने कॉलेज के सदर फ़िरोज़ कमाल अब्बासी की ओर से सभी मेहमानों, वक्ताओं, पत्रकारों, साहित्यिक हस्तियों और कार्यक्रम में शामिल लोगों का शुक्रिया अदा किया।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
समारोह में कोसर अब्बासी, इक़बाल अहमद खान, अमीर अमरोहवी, आरिफ मुनीर, मोमनीन कुरैशी, मौलाना हनीफ, मोहम्मद अहमद जैदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
डॉ. महताब अमरोहवी के लिए विशेष अवसर
अमरोहा की पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े डॉ. महताब अमरोहवी के लिए यह पुस्तक विमोचन समारोह उनके लंबे लेखन अनुभव को पुस्तक के रूप में पाठकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर रहा। ‘फ़न-ए-क़लम निगारी और कुछ मेरे कॉलम’ में पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं के साथ-साथ कॉलम लेखन की शैली, विषय चयन और सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों को समेटने का प्रयास किया गया है।
स्रोत: उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर।