मुसलमानों का क़िबला काबा: मोमिनों की आस्था और इबादत का मरकज़
मक्का मुकर्रमा: सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का मुकर्रमा में स्थित काबा शरीफ दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। करोड़ों मुसलमान दिन में पाँच वक्त की नमाज़ के दौरान इसी दिशा की ओर रुख करते हैं। काबा को इस्लामी परंपरा में बैतुल्लाह यानी अल्लाह का घर कहा जाता है।
काबा शरीफ मस्जिद अल-हराम के मध्य में स्थित है। हर वर्ष दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लाखों मुसलमान हज और उमरा के लिए मक्का मुकर्रमा पहुंचते हैं और काबा का तवाफ करते हैं।

क़िबला क्यों है काबा?
क़ुरआन में मुसलमानों को नमाज़ के दौरान मस्जिद अल-हराम की दिशा में रुख करने का आदेश दिया गया है। इससे पहले मुसलमान बैतुल-मक़दिस की दिशा में नमाज़ अदा करते थे। बाद में क़िबला काबा की ओर कर दिया गया।
क़ुरआन की सूरह अल-बक़रह (2:144) में मस्जिद अल-हराम की ओर रुख करने का निर्देश मिलता है।

हज़रत इब्राहीम और हज़रत इस्माईल से जुड़ी परंपरा
इस्लामी मान्यता के अनुसार, काबा की तामीर/पुनर्निर्माण हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से किया। क़ुरआन में भी दोनों के काबा की बुनियाद उठाने का उल्लेख मिलता है।
काबा से जुड़ी यह विरासत मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हज तथा उमरा की कई प्रमुख इबादतें इसी पवित्र स्थल के इर्द-गिर्द होती हैं।

काबा और तवाफ
हज और उमरा के दौरान जायरीन काबा शरीफ का तवाफ करते हैं। तवाफ में काबा के चारों ओर सात चक्कर लगाए जाते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आने वाले मुसलमान यहां एक ही दिशा और एक ही केंद्र की ओर एकत्र होते हैं।
काबा शरीफ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मुसलमानों की इबादत और धार्मिक एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाला मुसलमान नमाज़ के लिए इसी क़िबले की ओर रुख करता है।
जनवाणी हिन्दुस्तान की इस पहली विशेष प्रस्तुति में हम अपने पाठकों तक दुनिया के महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक और जनहित से जुड़े विषयों को तथ्यात्मक और जिम्मेदार तरीके से पहुंचाने का प्रयास करेंगे।